नई दिल्ली, 4 अप्रैल
वाणिज्य मंत्रालय भारतीय फार्मा निर्यातकों के साथ सक्रिय बातचीत कर रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र पर संभावित अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पारस्परिक टैरिफ के पहले चरण में छूट दी गई थी।
सरकार और फार्मा निर्यातकों के बीच चर्चा तब शुरू हुई, जब ट्रंप ने फार्मा आयात पर "अभूतपूर्व" टैरिफ लगाने का संकेत दिया (गुरुवार, अमेरिकी समय)।
हालांकि सीमांत टैरिफ से बहुत अधिक व्यवधान नहीं हो सकता है, लेकिन भारी शुल्क भारतीय दवा निर्माताओं के लाभ मार्जिन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
भारत के फार्मा निर्यात के लिए अमेरिका एक प्रमुख बाजार है, जहां भारत अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली सभी जेनेरिक दवाओं का लगभग 40 प्रतिशत आपूर्ति करता है।
अमेरिका को भारतीय फार्मा निर्यात सालाना लगभग 9 बिलियन डॉलर का है। एक रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ में कोई भी तेज वृद्धि न केवल भारतीय निर्यातकों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
ट्रम्प ने कई क्षेत्रों को लक्षित करते हुए टैरिफ की एक नई लहर शुरू की है। इसमें सभी आयातित कारों और हल्के-ड्यूटी ट्रकों पर 25 प्रतिशत टैरिफ और अन्य आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत न्यूनतम टैरिफ शामिल है।
भारत पर 27 प्रतिशत की मिश्रित पारस्परिक टैरिफ दर लगाई गई है।