नई दिल्ली, 29 मार्च
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने हाल ही में UPI नंबर-आधारित भुगतान के लिए ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से संख्यात्मक UPI ID समाधान पर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नए दिशा-निर्देश 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे।
UPI सदस्य बैंकों, UPI ऐप और थर्ड पार्टी प्रदाताओं के लिए इन नए दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
नए मानदंडों के अनुसार, निष्क्रिय मोबाइल नंबर से जुड़ी UPI ID निष्क्रिय हो जाएगी। यानी अगर किसी UPI उपयोगकर्ता का बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है, तो उपयोगकर्ता की UPI ID भी अनलिंक हो जाएगी और वह व्यक्ति UPI सेवा का उपयोग नहीं कर पाएगा।
ऐसी स्थिति में UPI सेवा का उपयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर सक्रिय हो।
UPI सेवा का उपयोग बिना किसी समस्या के तभी किया जा सकता है, जब बैंक रिकॉर्ड को सही मोबाइल नंबर के साथ अपडेट रखा जाए। निष्क्रिय या फिर से असाइन किए गए मोबाइल नंबर से जुड़ी UPI सेवा में समस्याएँ हो सकती हैं।
दूरसंचार विभाग (DoT) के नए नियमों के अनुसार, डिस्कनेक्ट होने के 90 दिनों के बाद किसी नए उपयोगकर्ता को मोबाइल नंबर असाइन किया जा सकता है। अगर किसी ग्राहक के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कॉल, मैसेज या डेटा के लिए नहीं किया जा रहा है, तो ऐसे नंबरों को टेलीकॉम प्रदाता निष्क्रिय कर देते हैं। इन नंबरों को रीसाइकिल या चर्न्ड नंबर कहा जाता है।
नए दिशा-निर्देशों के तहत, उपयोगकर्ता का बैंक-सत्यापित मोबाइल नंबर उपयोगकर्ता के UPI पहचानकर्ता के रूप में काम करेगा।